Monday, 21 November 2016

एक दीपक

एक दीपक जल रहा है,
दिक्-दिगंत प्रकाश को।
अपनी लौकिक शक्ति से,
सामूहिक विकास को।

सीमा हो सुरक्षित अपनी,
वचन पुख्ता चाहिए।
भीतरी गद्दारों से,
हिसाब चुकता चाहिए।

इसलिए हे हिन्दवासी!
स्नेह से सींचो इसे।
थोड़ा वक़्त और दो,
अति भार है दिया जिसे।

सादर-
डॉ. राजा राम यादव

Monday, 14 November 2016

नोट बंदी एक ऐतिहासिक साहसिक कदम


निस्संदेह यह कठिन घड़ी है और हमें बुद्धि-विवेक से काम लेना होगा। याद रखें  कि जीने-खाने, शादी-विवाह, हँसी-ख़ुशी के लिए अधिक पैसों की जरूरत नहीं पड़ती है पर दिखावे/शोऑफ के लिए कितनी भी राशि कम पड़ेगी। इसलिए खुश रहें और खुशियां बांटें, दर्द और उदासी नहीं। हाय-तौबा मचाने की जरूरत नही है। हम-आप समझते ही हैं कि कुछ लोग डर से, कुछ शौक से, कुछ पैसों/कमीशन की लालच में, कुछ दूसरों के कहने पर और कुछ फोटो खिंचाने तथा सुर्खियां बटोरने बैंक आ रहे  हैं। इसी वजह से कई जरुतमंदों को भी पैसा नही मिल पा रहा है।
कितना ही अच्छा हो कि हम अब भी समझ जाएं कि हमने किसी खिलौने को प्रधानमंत्री नहीं बनाया है जो मदारी के डमरू पर डांस करे। वह तो भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध महाप्रलय का शंख फूंक चुके हैं और इसकी गर्जना से बेईमानो का दिल दहल रहा है। हमें ईमानदारी से जीने की आदत डालनी ही पड़ेगी और अपनी अगली पीढ़ी की खुशहाल जिंदगी तथा सुरक्षित भविष्य की खातिर थोड़ी परेशानी उठानी ही पड़ेगी।
वर्तमान समस्या के कुछ उपाय इस प्रकार हैं-
1. निहायत जरूरी हो तभी पैसा निकालने या डालने बैंक/एटीएम जाएं।
2. भीड़ छंटने तक दूध/राशन आदि के लिए उधार/क्रेडिट कार्ड का प्रयोग करें।
3. पेट्रोल भराने और सभी प्रकार के बिलों का भुगतान क्रेडिट कार्ड से करें।
4. मनी ट्रांसफर के लिए NEFT/IMPS का प्रयोग करें।
5. कमीशन की लालच में न पड़ें और अपने सम्पर्क के लोगो को भी सचेत करें। गहराई से विचार करें तो आपकी हर छोटी-बड़ी समस्या का समाधान आपके इर्द-गिर्द ही मिल जाएगा।
6. दूसरों का पैसा अपने खाते में न डालें, न ही अपनी गाढ़ी कमाई के हजार/पाँच सौ के नोटों को कम कीमत पर किसी को दें। इन्हें 30 दिसम्बर से पहले अपने खाते में जमा कराएं, डेढ़ महीने का लंबा समय शेष है।
7. जिन्हें गहरा आघात लगा है वे अपने चमचों को उकसाकर माहौल को बिगाड़ने का घिनौना प्रयास भी कर सकते हैं अतः किसी प्रकार के उकसावे/अफवाह से बचें।
8. याद रखें कि कोई भी समस्या हमेशा-हमेशा के लिए नही होती। यह तूफ़ान भी चला जाएगा। आपके जायज धन को आपसे कोई नही छीन सकता है।
9. धैर्य रखें थोड़े दिनों में सब नॉर्मल हो जाएगा फिर आपको अपने योगदान पर गर्व होगा।
10. राष्ट्र निर्माण के महायज्ञ में अपने हिस्से की आहुति अवश्य अर्पित करें।
God bless all of us.
जय हिंद।

Sunday, 25 September 2016

हिंदी : हिंद का वाङ्गमय

हिंदी जन की भाषा है;
हिंदी जन की साँस।
हिंद की परिभाषा यह;
हिंदी जग की आस।।