फ़िल्म पद्मावत - एक बेबुनियाद विरोध
इतिहासकार, फ़िल्म समीक्षक और न्यूज़ नेशन की टीम के साथ फ़िल्म पद्मावत की स्क्रीनिंग में शरीक होने का अवसर मिला। जो कुछ भी नकारात्मक बातें इस फ़िल्म के संबंध में मैंने अपने कानों से सुन रखी थी; अपनी आंखों से देखने के बाद वे सारी बातें निर्मूल, निराधार और कोरी कल्पना साबित हुई। इस फ़िल्म में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे राजपूती शान में किसी तरह का कोई बट्टा लगे। मैं तो कहूंगा कि यह फ़िल्म राजपूतों की ही नहीं बल्कि हिन्दू समाज की शौर्य गाथा का और अधिक ऊंचे स्वर में गायन है।
इस फ़िल्म में राजपूत क्षत्राणी तीरंदाजी करती दिखाई गई हैं। उन्हें विदुषी, युद्ध कला में निपुण, राजनीति में निष्णात, कूटनीति में दक्ष और अपनी आन-बान और शान की खातिर सम्पूर्ण बलिदान देने को तत्पर वीरांगना के रूप में दिखाया गया है। राजपूत समाज अपने शौर्य और पराक्रम के लिए सदैव प्रसिद्ध रहा है। वे शत्रु के भी आत्मीय निमंत्रण पर निहत्थे होकर जाते हैं। वे अपने जीवन-मूल्य की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने को तैयार हैं।
इस फ़िल्म को देखकर आपके अंदर इतिहास को समझने की ललक पैदा होगी और सत्य का अनुसंधान करने की दृष्टि विकसित होगी जिससे न केवल आप अपने गौरवशाली इतिहास की ओर आकृष्ट होंगें बल्कि अपनी प्राचीन भूलों को सुधारकर नवीन जीवन मूल्य स्थापित कर सकेंगे।
एकबार अवश्य देखिए। बिना देखे टिप्पणी मत कीजिए; विरोध तो बहुत दूर की बात है।
- - -
डॉ. राजा राम यादव
मोब. - 9911894311
23.01.2018