Monday, 20 May 2019
Wednesday, 8 May 2019
Monday, 22 April 2019
Sunday, 7 April 2019
Sunday, 27 January 2019
यहां तिरंगा रहने दो
यहां तिरंगा रहने दो
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फूलों की अनुपम बगिया में,
सुमन विविध-विधि खिलने दो।
पुष्पगन्ध और गन्धपुष्प को,
एक साथ अब मिलने दो।
हर भूखे को मिले निवाला,
कर को कारज मिलने दो।
चटक चुकी चोखी चादर को,
मिल-जुल कर अब सिलने दो।
भाव के भूखे दुखियारों को,
भावपुष्प अब मिलने दो।
एक साथ सब रहें अम्न से,
हर दिल से दिल मिलने दो।
इतनी केवल आज़ादी कि,
अपनी बातें कहने दो।
फ़रियादी फ़रियाद सुनाए,
और वज़ीर को सुनने दो।
अधिक अज़ादी फ़क़त समस्या,
जिह्वा को अब अड़ने दो।
अपने-अपने हिस्से का अब,
काम सभी को करने दो।
क्षमाशीलता, दया-धर्म की,
सरिता-निर्मल बहने दो।
क्रॉस-कमंडल, चांद-शिवाला
साथ-साथ सब सजने दो।
राष्ट्रपुरुष साक्षात हिन्द को,
जगद्गुरू फिर बनने दो।
हरा-सुशोभित, भगवा-सादा,
यहां तिरंगा रहने दो।
हरा-सुशोभित, भगवा-सादा,
यहां तिरंगा रहने दो।
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सस्नेह-
डॉ. राजा राम यादव
जन जागृति : Awakening People
26.01.2019
Thursday, 24 January 2019
मेहरबानी आपकी
मेहरबानी आपकी
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आप आए ज़िंदगी में,
ये कहानी आपकी।
बस गए सबके दिलों में,
मेहरबानी आपकी।
उम्र काटी है तेरे संग,
याद रखना ऐ गीते!
ना रही दुसवारियां जब,
साथ जो तुम हो गीते!
ग़र ख़ता हो जाए मुझसे,
माफ़ करना ऐ सखे!
ग़र कहीं नज़रें उठाऊं,
तेरी ही सूरत दिखे।
'दीप' यह जलता रहे अब,
इस ज़माने में सतत।
कट गई है ज़िंदगानी,
'नेह' पाने में मेरी।
ओ! मेरी हमराह, 'गीते',
साथ देना उम्रभर।
सारी फर्जों को निभाकर,
बन सकूं गीतापते!
सारी फर्जों को निभाकर,
बन सकूं गीतापते!
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सस्नेह💐
डॉ. राजा राम यादव
25.01.2019
Friday, 18 January 2019
ऐ मेरे दिलवर, ठहर!
ऐ मेरे दिलवर, ठहर!
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ऐ मेरे दिलवर, ठहर! कि,
मैं तुझे निहार लूँ।
और अपनी बाजुओं से,
आरती उतार लूँ।
आ गई ग़र मौत भी तो,
बोल दूंगा मैं उसे।
अपने आशिक देवता से,
एक पल उधार लूँ।
कौन है जिया? यहां की,
ज़िन्दगी में उम्र भर।
क्यों न फिर? इस ज़िंदगी से,
ज़िंदगी संवार लूँ।
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सस्नेह💐
डॉ. राजा राम यादव
16.01.2019