ऐ मेरे दिलवर, ठहर!
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ऐ मेरे दिलवर, ठहर! कि,
मैं तुझे निहार लूँ।
और अपनी बाजुओं से,
आरती उतार लूँ।
आ गई ग़र मौत भी तो,
बोल दूंगा मैं उसे।
अपने आशिक देवता से,
एक पल उधार लूँ।
कौन है जिया? यहां की,
ज़िन्दगी में उम्र भर।
क्यों न फिर? इस ज़िंदगी से,
ज़िंदगी संवार लूँ।
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सस्नेह💐
डॉ. राजा राम यादव
16.01.2019
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