दिनकर महोत्सव : सिमरिया
दिनकर महोत्सव, सिमरिया, बेगूसराय में शामिल होने का सुयोग प्राप्त हुआ। आत्मीय आतिथ्य और सरोकारी सत्कार से जितनी प्रसन्नता हुई उससे अधिक प्रसन्नता महती आयोजन और व्यापक व्यवस्था से रू-ब-रू होकर हुई। बहुत अच्छा लगा। इस बेहतरीन प्रबंधन के लिए आयोजक और मुख्य यजमान श्रीमान बिपिन ईश्वर जी सचमुच बधाई के पात्र हैं। इन्हें ढेरों बधाइयाँ और असीमानंत मंगल कामनाएं। साहित्य, संस्कृति और समाज को उन्नयन प्रदान करने वाले इस तरह के और भी आयोजनों की आशा की जा सकती है।
इस विराट आयोजन की जितनी भी प्रशंसा की जाए, कम है। कुछ छोटी-मोटी त्रुटियों को अगर नज़रअंदाज़ कर दिया जाए तो यह अपनी तरह का एक विशिष्ट आयोजन रहा। पूर्वाह्न से मध्याह्न तक सन्त शिरोमणि श्री मोरारी बापू जी के श्रीमुख से श्रीरामकथा का अविरल प्रवाह। संध्या बेला में सघन साहित्यिक समागम। और, रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रमों के फुलझड़ियों की बहार। कुल मिलाकर, दिनांक 1 दिसंबर 2018 से 9 दिसम्बर 2018 तक अजस्र प्रवाहित होने वाला विमर्श और सिमरिया का यह दिनकर महोत्सव आध्यात्मिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक सम्मेलनों का अनूठा संगम रहा।
अगर कुछ ऐसा हो कि पतितपावनी माँ गंगा के सुरम्य तट पर स्थित, सिमरिया की इस पावन भूमि पर दिनकर विश्वविद्यालय स्थापित हो जाए तो समस्त भारतीय भाषाओं के लिए नए आयाम स्थापित हो सकते हैं। विधि साहित्य, वैज्ञानिक और तकनीकी साहित्य, भाषा विज्ञान, व्याकरण और प्रयोजनमूलक हिंदी के अन्यान्य क्षेत्रों के अलावा, सृजनात्मक लेखन की विविध विधाओं में व्यापकता तथा अनुवाद कार्य में एकरूपता आएगी। समस्त भारतीय भाषाओं को विस्तृत फलक प्राप्त हो सकेगा और प्राकृतिक संकटों से जूझ रहे इस अभागे अविकसित क्षेत्र (बेगूसराय, समस्तीपुर, खगड़िया और मुंगेर के आसपास कहीं भी एक भी इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज या विश्वविद्यालय नहीं है) के साधनविहीन छात्रों का भाग्योदय हो सकेगा। हो सकता है हमें कुछ और दिनकर मिल जाएंगे। राजभाषा हिंदी न केवल राष्ट्रभाषा बल्कि विश्वभाषा बन सकेगी। कदाचित यही राष्ट्रकवि दिनकर के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
जय हिंद : जय हिंदी।
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डॉ. राजा राम यादव
07.12.2018
(जन्मदिन)
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