Sunday, 27 January 2019

यहां तिरंगा रहने दो


यहां तिरंगा रहने दो
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फूलों की अनुपम बगिया में,
सुमन विविध-विधि खिलने दो।
पुष्पगन्ध और गन्धपुष्प को,
एक साथ अब मिलने दो।

हर भूखे को मिले निवाला,
कर को कारज मिलने दो।
चटक चुकी चोखी चादर को,
मिल-जुल कर अब सिलने दो।

भाव के भूखे दुखियारों को,
भावपुष्प अब मिलने दो।
एक साथ सब रहें अम्न से,
हर दिल से दिल मिलने दो।

इतनी केवल आज़ादी कि,
अपनी बातें कहने दो।
फ़रियादी फ़रियाद सुनाए,
और वज़ीर को सुनने दो।

अधिक अज़ादी फ़क़त समस्या,
जिह्वा को अब अड़ने दो।
अपने-अपने हिस्से का अब,
काम सभी को करने दो।

क्षमाशीलता, दया-धर्म की,
सरिता-निर्मल बहने दो।
क्रॉस-कमंडल, चांद-शिवाला
साथ-साथ सब सजने दो।

राष्ट्रपुरुष साक्षात हिन्द को,
जगद्गुरू फिर बनने दो।
हरा-सुशोभित, भगवा-सादा,
यहां तिरंगा रहने दो।

हरा-सुशोभित, भगवा-सादा,
यहां तिरंगा रहने दो।

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सस्नेह-
डॉ. राजा राम यादव
जन जागृति : Awakening People
26.01.2019

Thursday, 24 January 2019

मेहरबानी आपकी

मेहरबानी आपकी
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आप आए ज़िंदगी में,
ये कहानी आपकी।
बस गए सबके दिलों में,
मेहरबानी आपकी।

उम्र काटी है तेरे संग,
याद रखना ऐ गीते!
ना रही दुसवारियां जब,
साथ जो तुम हो गीते!

ग़र ख़ता हो जाए मुझसे,
माफ़ करना ऐ सखे!
ग़र कहीं नज़रें उठाऊं,
तेरी ही सूरत दिखे।

'दीप' यह जलता रहे अब,
इस ज़माने में सतत।
कट गई है ज़िंदगानी,
'नेह' पाने में मेरी।

ओ! मेरी हमराह, 'गीते',
साथ देना उम्रभर।
सारी फर्जों को निभाकर,
बन सकूं गीतापते!

सारी फर्जों को निभाकर,
बन सकूं गीतापते!
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सस्नेह💐
डॉ. राजा राम यादव
25.01.2019

Friday, 18 January 2019

ऐ मेरे दिलवर, ठहर!


ऐ मेरे दिलवर, ठहर!
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ऐ मेरे दिलवर, ठहर! कि,
मैं तुझे निहार लूँ।
और अपनी बाजुओं से,
आरती उतार लूँ।

आ गई ग़र मौत भी तो,
बोल दूंगा मैं उसे।
अपने आशिक देवता से,
एक पल उधार लूँ।

कौन है जिया? यहां की,
ज़िन्दगी में उम्र भर।
क्यों न फिर? इस ज़िंदगी से,
ज़िंदगी संवार लूँ।

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सस्नेह💐
डॉ. राजा राम यादव
16.01.2019

Tuesday, 15 January 2019

क्या कहूँ!

क्या कहूँ!
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तुमको बस वो ही मिला,
जो चाहता जहाँ है।
मुझको तो इतना मिला।
जो मेरा हर जहां है।

मुद्दतें लग जाती हैं,
दिलवरी कमाने में।
तेरी कीमत दे सके वो,
दम नहीं ज़माने में।

मेरी दौलत सिर्फ तुम हो,
सुन लो इस दीवाने से।
तुझपे है कुर्बान हरकुछ,
पाया जो जमाने से।
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डॉ. राजा राम यादव
14.01.2019

वो हमारी रूह है!


वो हमारी रूह है!
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दिल में बस दे दो जगह कि,
वो मोहब्बत मिल सके।
प्यार की ये पंखुड़ी भी,
फूल माफ़िक खिल सके।

यह रूहानी तेरी काया,
मेरी ख़ातिर रूह है,
रूह है तू, और तेरी गोद,
मेरी रूह है।

फ़लसफ़ा हूँ मैं फ़क़त अब,
इस रूहानी मौज का।
मेरे सीने में बसा है,
वो भी तेरी रूह है।

तुम हो मंजिल जन्नते।
औ मैं हूँ नादानी सफर।
हो सकेगी कद्रदानी,
कैसे मेरे हमसफ़र?

क्या तुम्हारी मेज़वानी?
कर सकूंगा मैं कभी।
आ बसो मेरी रगों में,
ओ मेरे मेहमां अभी।

आ बसो मेरी रगों में,
ओ मेरे मेहमां अभी।
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सप्रेम💐
डॉ. राजा राम यादव
14.01.2019