Tuesday, 15 January 2019

वो हमारी रूह है!


वो हमारी रूह है!
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दिल में बस दे दो जगह कि,
वो मोहब्बत मिल सके।
प्यार की ये पंखुड़ी भी,
फूल माफ़िक खिल सके।

यह रूहानी तेरी काया,
मेरी ख़ातिर रूह है,
रूह है तू, और तेरी गोद,
मेरी रूह है।

फ़लसफ़ा हूँ मैं फ़क़त अब,
इस रूहानी मौज का।
मेरे सीने में बसा है,
वो भी तेरी रूह है।

तुम हो मंजिल जन्नते।
औ मैं हूँ नादानी सफर।
हो सकेगी कद्रदानी,
कैसे मेरे हमसफ़र?

क्या तुम्हारी मेज़वानी?
कर सकूंगा मैं कभी।
आ बसो मेरी रगों में,
ओ मेरे मेहमां अभी।

आ बसो मेरी रगों में,
ओ मेरे मेहमां अभी।
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सप्रेम💐
डॉ. राजा राम यादव
14.01.2019

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