यहां तिरंगा रहने दो
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फूलों की अनुपम बगिया में,
सुमन विविध-विधि खिलने दो।
पुष्पगन्ध और गन्धपुष्प को,
एक साथ अब मिलने दो।
हर भूखे को मिले निवाला,
कर को कारज मिलने दो।
चटक चुकी चोखी चादर को,
मिल-जुल कर अब सिलने दो।
भाव के भूखे दुखियारों को,
भावपुष्प अब मिलने दो।
एक साथ सब रहें अम्न से,
हर दिल से दिल मिलने दो।
इतनी केवल आज़ादी कि,
अपनी बातें कहने दो।
फ़रियादी फ़रियाद सुनाए,
और वज़ीर को सुनने दो।
अधिक अज़ादी फ़क़त समस्या,
जिह्वा को अब अड़ने दो।
अपने-अपने हिस्से का अब,
काम सभी को करने दो।
क्षमाशीलता, दया-धर्म की,
सरिता-निर्मल बहने दो।
क्रॉस-कमंडल, चांद-शिवाला
साथ-साथ सब सजने दो।
राष्ट्रपुरुष साक्षात हिन्द को,
जगद्गुरू फिर बनने दो।
हरा-सुशोभित, भगवा-सादा,
यहां तिरंगा रहने दो।
हरा-सुशोभित, भगवा-सादा,
यहां तिरंगा रहने दो।
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सस्नेह-
डॉ. राजा राम यादव
जन जागृति : Awakening People
26.01.2019