नववर्ष की मंगल आशा
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नवजीवन के उल्लासों से,
नव गीत सजे, संगीत बजे।
और प्रेम-सुसज्जित कविता से
इस धरणी का श्रृंगार सजे।।
हम प्यार लुटाने वालों का,
घर-आंगन, चारों द्वार सजे।
तन-मन का ताप मिटाकर के,
हर जीवन का संसार सजे।
त्यौहारों की इस बगिया में,
हम सबका, कोषागार सजे।
धन-धर्म-धान्य-पूरित धरती,
मानवता का श्रृंगार सजे।
बल-बुद्धि-विद्या-अवलम्बित,
हर छवि और आचार सजे।
करुणा-सिंचित-सद्भावों से,
हम सबका, हर व्यवहार सजे।
हम पाएं हरदम, हर खुशियां,
जीवन का हर व्यापार सजे।
और स्नेहसिक्त उद्गारों से,
नव-नूतन यह त्यौहार सजे - - -
नव-नूतन यह त्यौहार सजे।
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नूतनवर्षाभिनंदन!
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सादर-💐
डॉ. राजा राम यादव
01.01.2019
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